एक लड़का था – नाम था आरव। हर दिन सोचता, “कल से पढ़ाई शुरू करूँगा, कल से मेहनत करूँगा।” पर वो ‘कल’ कभी नहीं आया।
समय बीतता गया, उसके दोस्त आगे बढ़ते गए और आरव वहीं रह गया... सिर्फ अफ़सोस के साथ।
एक दिन उसने आईने में खुद को देखा और कहा – “अब बहुत हुआ। जो समय बीत गया, वो नहीं लौटेगा... लेकिन जो बचा है, वो मेरा है।”
(बैकग्राउंड में घड़ी की टिक-टिक आवाज़ और बदलाव की झलक – आरव मेहनत करता दिखता है)
आज आरव सफल है – सिर्फ इसलिए क्योंकि उसने समय की कीमत समझी। याद रखो – समय ना कभी किसी के लिए रुका है, ना रुकेगा।
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